छुट-पुट

उन्मुक्त पर मेरे विचार, छुट-पुट पर इधर उधर

हिन्दी वीकिपीडिया-१

मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे उन्मुक्त, छुटपुट, और लेख लिखता हूं। उन्मुक्त, ब्लौगर डौट कौम पर है। छुटपुट और लेख वर्ड-प्रेस पर हैं। छुटपुट मे इस दुनिया मे और लोग क्या कह रहें हैं मेरी टिप्पणी के साथ रहता है।

उन्मुक्त में मेरे विचार हैं पर यह अक्सर कड़ियों मे रहते हैं। किसी भी विचार पर लिखने के पहले मैं रूप रेखा तो बना लेता हूं पर लिखता कड़ियों में ही हूं। एक साथ लिखना मुशकिल रहता है; कड़ियों मे लिखने मे आसानी होती है पर पढ़ने मे यदि विचार एक साथ एक जगह हों तो अच्छे लगते हैं। यह काम मैं अपने तीसरे चिट्ठे लेख पर करता हूं। मैने ऐसा सोचा था कि यदि उस विषय पर कुछ नया आये तो उंमुक्त में कड़ियों पर जोड़ने की बजाय उसे लेख की चिट्ठी पर ही जोड़ा जाय ताकि उस विषय पर एक जगह पूरी जानकारी भी रहे। लेख चिट्ठे पर इनकी पी.डी.एफ. फाईल भी है, उसे आप चाहें तो डाउनलोड कर सकते हैं।

मेरे लेख चिट्ठे पर एक दिन मितुल पटेल जी ने टिप्पणी करके पूछा, कि क्या वह मेरे लेखों को हिन्दी वीकिपीडिया में डाल सकते हैं। सच तो यह है कि उन्हे इस तरह की कोई अनुमति की आवश्यकता नहीं थी क्योंकि मेरे तीनो चिट्ठों की चिट्ठियां या बकबक पर पॉडकास्ट कॉपी-लेफ्टेड हैं। किसी को भी इनका किसी प्रकार से प्रयोग करना, या संशोधन करना, या संशोधन करके प्रयोग करने की स्वतंत्रता है। यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे देते हैं या उस चिट्ठी से लिंक देते हैं तो मुझे प्रसन्नता होगी, यदि नहीं देते हैं तो भी कोई बात नहीं। मेरा मक्सद, अपनी बात सामने लाने का है, चाहे इसका माध्यम मैं बनू या कोई और; चाहे इसका श्रेय मुझे मिले या किसी और को। यह बात अलग है कि किसी ने मेरे लेख को अपना लेख नहीं कहा :-) मितुल जी ने यह सब होते हुए भी मुझसे पूछा तो अच्छा लगा। कम से कम किसी को तो मेरे विचार, मेरे लेख पसन्द आये वरना मेरी चिट्ठियों पर यह बात इनसे ज्यादा मुझ पर लागू होती है।

मितुल जी ने मेरी लेख पर लिखी ‘लिनक्स की कहानी वाली चिट्ठी’ हिन्दी वीकिपीडिया पर डाली। इस बीच उनके और मेरे बीच ईमेल का आदान-प्रदान भी हुआ। वे हिन्दी वीकिपीडिया के प्रबन्ध से नहीं जुड़े हैं पर उसमें लेख लिखते हैं। उन्होने मुझे प्रेरित किया कि मैं हिन्दी वीकिपीडिया में लिखूं। मितुल जी ने एक लेख हिन्दी वीकिपीडिया के बारे में यहां लिखा है जिसमें उन्होने हम सबसे हिन्दी वीकिपीडिया पर लिखने के लिये प्रार्थना की है। मैने हिन्दी वीकिपीडिया पर अपने लेख डाले हैं और यह कर के मुझे अच्छा लगा। आप भी करें आपको भी अच्छा लगेगा।

मैने लेख चिट्ठे की ‘ओपेन सोर्स सॉफ्टवेर ‘ वाली चिट्ठी हिन्दी वीकिपीडिया पर डाली। इसमें एक चित्र भी है। उसे भी अपलोड करके रखा पर वह बहुत बड़ा था, देखने में भद्दा लग रहा था। मैं चाह कर भी उसे छोटा नहीं कर पाया – वह शायद इसलिये कि मासाब की पाठशाला ठीक से नहीं जाता हूं पर अब जाऊंगा। कुछ दिनो बाद जब उस लेख पर पुनः गया तो देखा कि किसी ने उसे एकदम ठीक कर दिया है और वह बहुत सुन्दर लग रहा है। मेरे विद्यार्थी जीवन मैं ‘नया दौर’ पिक्चर आयी थी उसका यह गाना याद आया,

साथी हांथ बढ़ाना, साथी रे,

एक अकेला थक जायेगा,
मिल कर बोझ उठाना।

हम मेहनत वालों ने जब भी मिल कर हांथ बढ़ाया
सागर ने रस्ता छोड़ा, पर्वत ने शीश झुकाया

एक से एक मिले तो राई बन सकती है पर्वत

सच यदि हम सब चिट्ठेकार बन्धु,

एक एक डाले लेख अपना
तो बन सकती है हिन्दी वीकिपीडिया सुंदर।

‘नया दौर’ पिक्चर के गाने को यदि आप सुनना चाहें तो आप इसे यहां सुन सकते हैं।

हिन्दी वीकिपीडिया पर – आप लेख लिखने के पहले क्या करें, उसमें किस तरह के लेख डालें, वहां पर मुझे किस तरह की मुश्कलें आयीं – इन सब के बारे में अगली बार चर्चा करेंगे। इस इन्तज़ार के बीच यदि आप यह जानना चाहें कि पेटेंट कब दिया जा सकता है; आविष्कार क्या होते हैं तो आप उसे उन्मुक्त चिट्ठे पर यहां पढ़ सकते हैं और यदि इसे सुनना चाहें तो इसे मेरे पॉडकास्ट, बकबक पर यहां सुन सकते हैं। मेरा प्रयत्न रहता है कि पेटेन्ट सिरीस की चिट्ठियां और ऑडियो क्लिपें, भारतीय समय के अनुसार हर बृहस्पतिवार की रात्रि को पोस्ट होंं। आप इन्हें वहां हमेशा देख सकते हैं या सुन सकते हैं

अन्य चिट्ठों पर क्या नया है इसे आप दाहिने तरफ साईड बार में, या नीचे देख सकते हैं।

August 12, 2006 - Posted by उन्मुक्त | hindi, सूचना | , , , , | 1 Comment

1 Comment »

  1. लो मैने भी कमर कस ली। अब विकिपेडिआ आ गयी अपनी प्राथमिकता में..

    Comment by Anunad | August 13, 2006


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