छुट-पुट

उन्मुक्त पर मेरे विचार, छुट-पुट पर इधर उधर

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  • RSS बकबक पर नयी प्रविष्टियां

    • The file 'सफल वकील, मुकदमा शुरू होने के पहले, सारे पहलू सोच लेते हैं' was added by unmukt
      सफल वकील, मुकदमा शुरू होने के पहले, सारे पहलू सोच लेते हैं.ogg इस हिन्दी पॉडकास्ट में चर्चा है कि अमेरिका के प्रसिद्ध वकील लाइबोविट्ज़ को पहला मुकदमा कैसे मिला और उसमें क्या हुआ। यह ऑग फॉरमैट में है इन फाईलों को आप,Audacity, Mplayer, VLC media player, या Firefox में सुन सकते हैं। फाईल को डाउनलोड कर उक्त प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्राम को डिफॉल्ट में कर ले […]
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      वकीलों की सबसे बेहतरीन जीवनी - कोर्टरूम.ogg यह हिन्दी पॉडकास्ट अमेरिका के प्रसिद्ध वकील लाइबोविट्ज़ और उसकी जीवनी कोर्टरूम के बारे में है। यह ऑग फॉरमैट में है इन फाईलों को आप, Audacity, Mplayer, VLC media player, या Firefox में सुन सकते हैं। फाईल को डाउनलोड कर उक्त प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्राम को डिफॉल्ट में कर लें। This podcast in Hindi is about famou […]
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      बुलबुल मारने पर दोष लगता है.ogg यह पॉडकास्ट इसी नाम से मेरी नयी श्रंखला की भूमिका है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप, Audacity, Mplayer, एवं VLC media player में सुन सकते हैं। फाईल को डाउनलोड कर उक्त प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्राम को डिफॉल्ट में कर लें। This podcast in Hindi is introduction of my new series. It is in ogg format. […]
  • RSS मुन्ने के बापू पर नयी प्रविष्टियां

    • पुराने रिश्तों में नया-पन, नये रिश्तें बनाने से बेहतर है
      यह चिट्ठी पति पत्नी के रिश्तों के एक पहलू के बारे में है।मैंने पिछली चिट्ठी 'मैं तुमसे प्यार करता हूं कहने के एक तरीका यह भी' में लिखा था कि इन्होंने (उन्मुक्त) मुझसे आज तक यह नहीं कहा कि 'मैं तुमसे प्यार करता हूँ' और मुझे इन शब्दों का इंतजार है। मैंने यह भी लिखा था,'यह मेरा जन्मदिन हमेशा याद रखते हैं पर लगभग दो दशक पहले मेरे जन्मदिन […]
    • बादलों का घर आना और गालों की लाली
      यह चिट्ठी शिलॉंग में हमारे कुछ अनुभवों को बताती है।कुछ दिन पहले अरविन्द भाईसाहब ने एक चिट्टी 'मैं शर्म से हुई लाल ....' लिख कर गालों की लाली के बारे में चर्चा की थी। इसके बाद अभिषेक भइया ने भी 'लाली देखो लाल की...!' चिट्ठी लिख कर कुछ अलग प्रकार के अनुभव के बारे में लिखा। इन चिट्ठियों पर मुझे २५ साल पहले गालों की लाली याद आयी। मैं बहुत दिन […]
    • मैं तुमसे प्यार करता हूं कहने के एक तरीका यह भी
      कुछ समय पहले शास्त्री भाईसाहब ने अपने चिट्ठे 'कच्चे धागे - Building Relations' पर एक चिट्ठी 'मैं तुमसे प्यार करता हूँ!!' नाम से लिखी। वे कहते हैं, 'आपसी स्नेह को प्रगट करना अधिकतर भारतीय पति पत्नी के लिये बहुत मुश्किल है ... इसमें एक बदलाव आना जरूरी है।' इन्होंने (उन्मुक्त) आज तक यह शब्द मुझसे नहीं कहे, मुझे इन शब्दों का इंतजार […]
    • महिला दिवस ८ मार्च को क्यों मनाया जाता है?
      अमेरिका में सोशलिस्ट पार्टी के आवाहन पर, यह दिवस सबसे पहले सबसे पहले यह २८ फरवरी १९०९ में मनाया गया। इसके बाद यह फरवरी के आखरी इतवार के दिन मनाया जाने लगा। १९१० में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन के सम्मेलन में इसे अन्तरराष्ट्रीय दर्जा दिया गया। उस समय इसका प्रमुख ध्येय महिलाओं को वोट देने के अधिकार दिलवाना था क्योंकि, उस समय अधिकर देशों में महिला को वोट दे […]
    • मुझे, जब विंडोज़ विस्टा की याद आयी
      मैं अध्यापिका हूं, गणित पढ़ाती हूं। मुझे काम की जगह से लैपटॉप मिला है। इस पर विंडोज़ विस्टा ऑपरेटिंग सिस्टम था। मैं इसके पहले डेस्कटॉप कंप्यूटर पर काम करती थी, जिस पर फेडोरा है। मुझे लैपटॉप पर काम करने में मुश्किल पड़ी।यह बहुत धीमा चलता था। किसी प्रोग्राम को चलाने के बाद बहुत देर तक इंतजार करना पड़ता था।लिनेक्स से विंडोज़ पर काम करना।यह लैपटॉप मेरा नहीं है, इ […]
  • बकबक पर पॉडकास्ट कैसे सुने

    बकबक पर अधिकतर ऑडियो क्लिपें ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,

    * Windows पर कम से कम Audacity एवं Winamp में;

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    * Mac-OX पर कम से कम Audacity में,

    सुन सकते हैं। ऑडियो क्लिप पर चटका लगायें फिर या तो डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्राम को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले। मैंने इसे ogg फॉरमैट में क्यों रखा है यह आप मेरे उन्मुक्त चिट्ठे की पापा, क्या आप उलझन में हैं चिट्ठी पर पढ़ सकते हैं। यदि इसे mp3 फॉरमैट में सुनना चाहें तो यहां चटका लगायें।
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  • RSS उन्मुक्त पर नयी प्रविष्टियां

  • Archive for August, 2006

    हिन्दी वीकिपीडिया-३

    Posted by उन्मुक्त on August 28, 2006

    जिमी वेल्स वीकिपीडिया के संस्थापक हैं। अगस्त के आखरी सप्ताह भारत आये हुऐ थे। २७ अगस्त को उनका साक्षात्कार इकोनोमिक्स टाइम्स में यहां छपा है , जो कि पढ़ने योग्य है।

    अखबार में छपी खबर के मुताबिक बंगाली और तेलगु वीकिपीडिया में ४००० से ज्यादा लेख हैं जब कि हिन्दी में करीब १५०० लेख ही हैं। यह विचारिणीय प्रश्न है। भारतीय भाषा के बलॉग के पुरुस्कार तो हिन्दी के ब्लॉगों को मिला पर वीकिपीडिया पर लेख बंगला और तेलगू के ज्यादा हैं। हम सब हिन्दी के बलॉग लेखकों को इस दिशा में भी सोचना चाहिये।

    मैने, कुछ समय पहले, उन्मुक्त चिठ्ठे पर पेटेंट के कई पहुलुवों पर चिट्ठियां प्रकाशित की थीं। इन्ही चिठ्ठियों को संग्रहीत कर के मैने एक पोस्ट ‘पेटेंट’ बना कर, अपने चिट्ठे लेख पर यहां पोस्ट की है। जिसे आप देख सकते हैं।

    अन्य चिट्ठों पर क्या नया है इसे आप दाहिने तरफ साईड बार में, या नीचे देख सकते हैं।

    अन्य सांकेतिक चिन्ह

    technogy, तकनीकी, सूचना, हिन्दी, विधि/कानून,

     

    Posted in IPR, hindi, सूचना | Tagged: , , , , | 3 Comments »

    क्या ओपेन सोर्स आंदोलन टूट रहा है?

    Posted by उन्मुक्त on August 22, 2006

    ओपेन सोर्स सौफ्टवेयर का सबसे लोकप्रिय लाइसेंस General Public License (जी.पी.एल.) है। इसके दो संस्करण आ चुके हैं, तीसरे के लिये बहस चल रही है और २००७ के शुरू में इसके आने की बात है। इसके दो मुद्दों पर विवाद है,

    1. Patents
    2. Digital Right mangment

    पहले मुद्दे पर HP वालों की आपत्ति है तो दूसरे पर लिनूस टोरवालड की। बिसिनेस औन लाइन का यह लेख देखें, जो इस विवाद के इन पहलूवों को उजागर करता है।

    यह महत्वपूर्ण है कि तकनीक से जुड़े लोग इसके बारे में क्या विचार रखते हैं पर मेरे विचार से ओपेन सोर्स आंदोलन के लिये यह भी महत्वपूर्ण है कि व्यापार जगत इस बारे में क्या सोचता है।

    पैसे के बिना तो घोड़ी भी नहीं चलती।

    २३-२४ अगस्त को IIM B bangalore में GPL-3 की अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन हो रहा है उसके बाद ज्यादा लोग IIT Delhi और Red Hat के द्वारा आयोजित सम्मेलन ‘Owning the Future’ में दिल्ली आ रहें हैं आशा है बड़े लोग मिल कर विवाद सुलझायेंगे। विवाद नहीं सुलझा तो शायद यह ओपेन सोर्स के लिये हानिकारक हो।

    इसी बीच यदि आप यह जानना चाहें कि हरिवंश राय बच्चन ने अपने तथा एक अन्य साहित्यकार के बीच लिखे पत्र के प्रकाशन को लेकर चले विवाद के बारे में अपनी जीवनी के पहले भाग में जिक्र किया है कि नहीं तो उसे आप उन्मुक्त चिट्ठे पर मेरी पोस्ट ‘क्या भूलूं क्या याद करूं ‘पर यहां पढ़ सकते हैं। यदि इस विवाद के बारे में पढ़ना चाहें तो हरिवंश राय बच्चन – विवाद पर यहां पढ़ सकते हैं

    अन्य चिट्ठों पर क्या नया है इसे आप दाहिने तरफ साईड बार में, या नीचे देख सकते हैं।

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    हिन्दी वीकिपीडिया-२

    Posted by उन्मुक्त on August 18, 2006

    मैने पिछली पोस्ट पर हिन्दी वीकिपीडिया पर लेख लिखने की बात की थी, यहां उसके बारे में कुछ और जानकारी है।

     

     

    वीकिपीडिया पर कौन लेख लिख सकता है?

    वहां पर कोई भी लेख लिख सकता है और किसी भी लेख को सही कर सकता है। इसके लिये उसे केवल वहां सदस्य बनना चाहिये। आप सदस्य बनें और लेख लिखना शुरू करें।

     

    क्या इसके अलावा कुछ और करना चाहिये?

    हां – यह भी समझ लें कि वहां फॉरमैटिंग कैसे की जाती है। हिन्दी वीकिपीडिया में इसके बारे में अच्छी सूचना नहीं है पर अंग्रेजी वीकिपीडिया में है जो कि यहां है इसे भी देखें। यदि समझ में न आये तो कोई बात नहीं है। हिन्दी वीकिपीडिया के उस लेख को देखें जिसकी फॉरमैटिंग अच्छी हो उसके ‘बदलें’ वाला बटन दबायें और देखें कि क्या टाईप है उस तरह की फॉरमैटिंग करने के लिये वही टाईप कर दें।

     

    किस तरह के लेख डालें?

    ब्लौगिंग की शुरूवात इन्टरनेट पर व्यक्तिगत डायरी लिखने की तरह से शुरू हुआ। अंग्रेजी चिट्ठों में काफी विविधिता, विभिन्नता , और परिपक्वता आ गयी है पर हिन्दी चिट्ठों में अभी समय लगेगा। यहां पर अधिकतर चिट्ठे व्यक्तिगत हैं। वीकिपीडिया, ज्ञान कोश है, मेरे विचार से इसमें व्यक्तिगत लेख नहीं होने जाने चाहिये।

     

    लिखने का स्टाईल कैसा होना चाहिये?

    ज्ञान कोश के लिये लेख third person में होने चाहिये। First person के लेख उसे व्यक्तिगत बना देते हैं पर मैं हमेशा first person में ही लिखता हूं। उसका कारण यह है कि first person में लिखे लेख को समझना ज्यादा आसान होता है। पर यह ज्ञान कोश के लिये ठीक नहीं है शायद इसलिये मेरा योगदान जो यहां है वह ठीक नहीं हो। पर मेरे विचार से इसकी चिन्ता छोड़ देनी चाहिये। यह बात दूसरा व्यक्ति अच्छी तरह से पकड़ सकता है और वह ठीक कर देगा।

     

    लिखने में क्या मुश्किलें आती हैं?

    मैं हमेशा से हिन्दी में दूसरी भाषा के शब्द का प्रयोग करने का हिमायती हूं – खास करके अंग्रेजी के शब्दों का। यह विवाद अपनी जगह अलग है और इसके बारे में अलग से चर्चा ठीक रहेगी। मुश्किल यह है कि दूसरी भाषा के शब्दों को कैसे लिखें। उनका कोई मानक हिज्जे नहीं है। अब software को ही लें इसके लिये हिन्दी में नया शब्द निकालना बेकार है इस अंग्रेजी शब्द को ही हिन्दी में ले लिया जाना चाहिये पर इसे लिखा कैसे जाय। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आप इसका उच्चारण कैसे करते हैं। मैने इसे हिन्दी (देवनागरी) में सॉफ्टवेर, सॉफटवेर, सॉफ़टवेर, सौफ्टवेर, सौफटवेर, सौफ़टवेर साफ्टवेर, साफटवेर, साफ़टवेर की तरह लिखते देखा है और अलग अलग समय इसे स्वयं अलग अलग तरह से लिखा है। मैं नहीं जानता कि इसे हिन्दी में कैसे लिखा जाय। जब बहुत से लोग मिल कर किसी काम को करें तो इन शब्दों का कोई मानक हिज्जे हो तो अच्छा रहे। ऐसे इस बारे में यह शब्दकोश सहायक है।

    इन प्रश्नों के अलावा मुझे तो कोई मुश्किल नहीं पड़ी और पड़ेगी तो बताऊंगा।

     

    तो देर किस बात की है हिन्दी वीकिपीडिया के मुख्य पेज पर पहुंचे, सदस्य बने, और अपना सहयोग शुरू करें।

    कुछ समय पहले हिन्दी चिट्ठे जगत में इस बात की चर्चा रही कि किसी कि ईमेल बिना उसकी अनुमति के सार्वनिक रूप से प्रकाशित करना उचित है कि नहीं। इस तरह का विवाद हरिवंश राय बच्चन और एक अन्य हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार के बीच, उनके द्वारा लिखे पत्र को लेकर, चला था। यदि इसके बारे में पढ़ना चाहें तो इसे ‘हरिवंश राय बच्चन – विवाद’ नामक मेरे उन्मुक्त चिट्ठे की पोस्ट पर यहां पढ़ सकते हैं।

    मैने पेटेंट सिरीस भाग एक की आखरी पोस्ट ‘पेटेंटी के अधिकार एवं दायित्व’ उन्मुक्त चिट्ठे पर यहां पोस्ट कर दिया है। आप चाहें तो उसे यहां पढ़ सकते हैं और यदि इसे सुनना चाहें तो इसे मेरे पॉडकास्ट बकबक पर, यहां सुन सकते हैं।

    मैने कुछ समय पहले उन्मुक्त चिठ्ठे पर ‘नारद जी की छड़ी और शतरंज का जादू’ के नाम से कई कड़ियों प्रकाशित की थी। इन्ही चिठ्ठियों को संग्रहीत कर के मैने एक चिट्ठि ‘२ की पॉवर के अंक, पहेलियां, और कमप्यूटर विज्ञान’ बना कर, अपने चिट्ठे लेख पर यहां

    पोस्ट की है। वहां पर इसकी pdf फाईल भी है जिसे आप डाऊनलोड कर प्रयोग करसकते हैं।

    अन्य चिट्ठों पर क्या नया है इसे आप दाहिने तरफ साईड बार में, या नीचे देख सकते हैं।

    अन्य सांकेतिक चिन्ह

    technogy, तकनीकी, सूचना, हिन्दी, विधि/कानून,

     

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    हिन्दी वीकिपीडिया-१

    Posted by उन्मुक्त on August 12, 2006

    मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे उन्मुक्त, छुटपुट, और लेख लिखता हूं। उन्मुक्त, ब्लौगर डौट कौम पर है। छुटपुट और लेख वर्ड-प्रेस पर हैं। छुटपुट मे इस दुनिया मे और लोग क्या कह रहें हैं मेरी टिप्पणी के साथ रहता है।

    उन्मुक्त में मेरे विचार हैं पर यह अक्सर कड़ियों मे रहते हैं। किसी भी विचार पर लिखने के पहले मैं रूप रेखा तो बना लेता हूं पर लिखता कड़ियों में ही हूं। एक साथ लिखना मुशकिल रहता है; कड़ियों मे लिखने मे आसानी होती है पर पढ़ने मे यदि विचार एक साथ एक जगह हों तो अच्छे लगते हैं। यह काम मैं अपने तीसरे चिट्ठे लेख पर करता हूं। मैने ऐसा सोचा था कि यदि उस विषय पर कुछ नया आये तो उंमुक्त में कड़ियों पर जोड़ने की बजाय उसे लेख की चिट्ठी पर ही जोड़ा जाय ताकि उस विषय पर एक जगह पूरी जानकारी भी रहे। लेख चिट्ठे पर इनकी पी.डी.एफ. फाईल भी है, उसे आप चाहें तो डाउनलोड कर सकते हैं।

    मेरे लेख चिट्ठे पर एक दिन मितुल पटेल जी ने टिप्पणी करके पूछा, कि क्या वह मेरे लेखों को हिन्दी वीकिपीडिया में डाल सकते हैं। सच तो यह है कि उन्हे इस तरह की कोई अनुमति की आवश्यकता नहीं थी क्योंकि मेरे तीनो चिट्ठों की चिट्ठियां या बकबक पर पॉडकास्ट कॉपी-लेफ्टेड हैं। किसी को भी इनका किसी प्रकार से प्रयोग करना, या संशोधन करना, या संशोधन करके प्रयोग करने की स्वतंत्रता है। यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे देते हैं या उस चिट्ठी से लिंक देते हैं तो मुझे प्रसन्नता होगी, यदि नहीं देते हैं तो भी कोई बात नहीं। मेरा मक्सद, अपनी बात सामने लाने का है, चाहे इसका माध्यम मैं बनू या कोई और; चाहे इसका श्रेय मुझे मिले या किसी और को। यह बात अलग है कि किसी ने मेरे लेख को अपना लेख नहीं कहा :-) मितुल जी ने यह सब होते हुए भी मुझसे पूछा तो अच्छा लगा। कम से कम किसी को तो मेरे विचार, मेरे लेख पसन्द आये वरना मेरी चिट्ठियों पर यह बात इनसे ज्यादा मुझ पर लागू होती है।

    मितुल जी ने मेरी लेख पर लिखी ‘लिनक्स की कहानी वाली चिट्ठी’ हिन्दी वीकिपीडिया पर डाली। इस बीच उनके और मेरे बीच ईमेल का आदान-प्रदान भी हुआ। वे हिन्दी वीकिपीडिया के प्रबन्ध से नहीं जुड़े हैं पर उसमें लेख लिखते हैं। उन्होने मुझे प्रेरित किया कि मैं हिन्दी वीकिपीडिया में लिखूं। मितुल जी ने एक लेख हिन्दी वीकिपीडिया के बारे में यहां लिखा है जिसमें उन्होने हम सबसे हिन्दी वीकिपीडिया पर लिखने के लिये प्रार्थना की है। मैने हिन्दी वीकिपीडिया पर अपने लेख डाले हैं और यह कर के मुझे अच्छा लगा। आप भी करें आपको भी अच्छा लगेगा।

    मैने लेख चिट्ठे की ‘ओपेन सोर्स सॉफ्टवेर ‘ वाली चिट्ठी हिन्दी वीकिपीडिया पर डाली। इसमें एक चित्र भी है। उसे भी अपलोड करके रखा पर वह बहुत बड़ा था, देखने में भद्दा लग रहा था। मैं चाह कर भी उसे छोटा नहीं कर पाया – वह शायद इसलिये कि मासाब की पाठशाला ठीक से नहीं जाता हूं पर अब जाऊंगा। कुछ दिनो बाद जब उस लेख पर पुनः गया तो देखा कि किसी ने उसे एकदम ठीक कर दिया है और वह बहुत सुन्दर लग रहा है। मेरे विद्यार्थी जीवन मैं ‘नया दौर’ पिक्चर आयी थी उसका यह गाना याद आया,

    साथी हांथ बढ़ाना, साथी रे,

    एक अकेला थक जायेगा,
    मिल कर बोझ उठाना।

    हम मेहनत वालों ने जब भी मिल कर हांथ बढ़ाया
    सागर ने रस्ता छोड़ा, पर्वत ने शीश झुकाया

    एक से एक मिले तो राई बन सकती है पर्वत

    सच यदि हम सब चिट्ठेकार बन्धु,

    एक एक डाले लेख अपना
    तो बन सकती है हिन्दी वीकिपीडिया सुंदर।

    ‘नया दौर’ पिक्चर के गाने को यदि आप सुनना चाहें तो आप इसे यहां सुन सकते हैं।

    हिन्दी वीकिपीडिया पर – आप लेख लिखने के पहले क्या करें, उसमें किस तरह के लेख डालें, वहां पर मुझे किस तरह की मुश्कलें आयीं – इन सब के बारे में अगली बार चर्चा करेंगे। इस इन्तज़ार के बीच यदि आप यह जानना चाहें कि पेटेंट कब दिया जा सकता है; आविष्कार क्या होते हैं तो आप उसे उन्मुक्त चिट्ठे पर यहां पढ़ सकते हैं और यदि इसे सुनना चाहें तो इसे मेरे पॉडकास्ट, बकबक पर यहां सुन सकते हैं। मेरा प्रयत्न रहता है कि पेटेन्ट सिरीस की चिट्ठियां और ऑडियो क्लिपें, भारतीय समय के अनुसार हर बृहस्पतिवार की रात्रि को पोस्ट होंं। आप इन्हें वहां हमेशा देख सकते हैं या सुन सकते हैं

    अन्य चिट्ठों पर क्या नया है इसे आप दाहिने तरफ साईड बार में, या नीचे देख सकते हैं।

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    अदृश्य हो जाने का अभिशाप

    Posted by उन्मुक्त on August 5, 2006

    मुझे मालुम था, सारे हिन्दी चिट्ठेकार बन्धु बुद्धिमान हैं। कोई भी मेरी बातों में नहीं आयेगा; कोई भी अदृश्य हो जाने का वरदान नहीं लेना पसन्द करेगा क्योंकि यह वरदान नहीं है यह तो अभिशाप है; जी हां अभिशाप है। यदि कोई व्यक्ति अदृश्य हो जाये तो वह देख नहीं सकेगा – वह अन्धा हो जायेगा। आप पूछेंगे मैं ऐसा इतने विश्वास से कैसे कह सकता हूं कि अदृश्य व्यक्ति अन्धा हो जायेगा। चलिये हम बात करें कि हम कैसे देखते हैं।

    हमें किसी वस्तु का अहसास तब होता है जब वह रोशनी की किरणो को या तो रोक ले, या मोड़ (refract) कर दे; या फिर परिवर्तित (reflect) कर दे। हमारी आखों की पुतलियां रोशनी को मोड़ कर, रेटिना पर केंद्रित करती हैं जिसके कारण हम देख पाते हैं। अदृश्य होने का मतलब तो यह है कि रोशनी की किरणे हमारे शरीर से आर पार हो जायेंगी – हमारा शरीर न तो रोशनी की किरणो को रोक पायेगा न उन्हे मोड़ पायेगा और न ही परिवर्तित कर पायेगा।। हमारी आखों की पुतलियां भी उन्हे मोड़ कर रेटिना पर केन्द्रित नहीं कर पायेंगी। यदि रेटिना पर केन्द्रित नहीं होंगी तो हम देख नहीं सकते। यही बात एच.जी. वेल्स की पुस्तक ‘द इंविसिबल मैन’ तथा ‘मिस्टर इन्डिया’ और ‘गायब’ नाम की पिक्चरों को विज्ञान की दृष्टि में कमजोर बनाती हैं।

    मुझे लगता है कि अगली बार कोई कठिन सवाल पूछना पड़ेगा। जब तक मैं कठिन सवाल सोचता हूं तब तक आप चाहें तो आप पेटेंट के इतिहास के बार में जानना चाहें तो उसे मेरे उन्मुक्त के चिट्ठे पर ‘१.४ पेटेंट प्राप्त करने की प्रक्रिया का सरलीकरण’ की चिट्ठी यहां पढ़ सकते हैं और यदि आप इसे पढ़ने के बजाय इसे सुनना पसन्द करें तो इसे बकबक चिट्ठे पर यहां सुन सकते हैं।

    उन्मुक्त चिट्ठे की पांच चिट्ठियों पर मैने रिचर्ड फिलिप्स फाइनमेन की जीवनी के बारे में बताया था इन्हे एक जगह संग्रहीत करके उनकी जीवनी एक जगह की है इसे आप मेरे लेख चिट्ठे पर यहां देख सकते हैं।

    मेरा प्रयत्न रहता है कि पेटेंट सिरीस की चिट्ठियां और इनकी ऑडियो क्लिपें, भारतीय समय के अनुसार हर बृहस्पतिवार की रात्रि को उंमुक्त चिट्ठे और बकबक पॉडकास्ट पर पोस्ट होंं। इन्हे आप वहां पर अगले बृहस्पतिवार १० अगस्त को देख या सुन सकते हैं।

    अन्य चिट्ठों पर क्या नया है इसे आप दाहिने तरफ साईड बार में, या नीचे देख सकते हैं।

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