छुट-पुट

उन्मुक्त पर मेरे विचार, छुट-पुट पर इधर उधर

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  • RSS बकबक पर नयी प्रविष्टियां

    • The file 'क्या चश्मदीद गवाह, न चाहते हुए भी, गलत बयान दे देते हैं' was added by unmukt
      क्या चश्मदीद गवाह, न चाहते हुए भी, गलत बयान दे देते हैं.ogg इस हिन्दी पॉडकास्ट में चर्चा है कि क्या चश्मदीद गवाह, न चाहते हुए भी, गलत बयान दे देते हैं? यह ऑग फॉरमैट में है इन फाईलों को आप,Audacity, Mplayer, VLC media player, या Firefox में सुन सकते हैं। फाईल को डाउनलोड कर उक्त प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्राम को डिफॉल्ट में कर लें। This podcast in Hindi ex […]
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      सफल वकील, मुकदमा शुरू होने के पहले, सारे पहलू सोच लेते हैं.ogg इस हिन्दी पॉडकास्ट में चर्चा है कि अमेरिका के प्रसिद्ध वकील लाइबोविट्ज़ को पहला मुकदमा कैसे मिला और उसमें क्या हुआ। यह ऑग फॉरमैट में है इन फाईलों को आप,Audacity, Mplayer, VLC media player, या Firefox में सुन सकते हैं। फाईल को डाउनलोड कर उक्त प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्राम को डिफॉल्ट में कर ले […]
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      वकीलों की सबसे बेहतरीन जीवनी - कोर्टरूम.ogg यह हिन्दी पॉडकास्ट अमेरिका के प्रसिद्ध वकील लाइबोविट्ज़ और उसकी जीवनी कोर्टरूम के बारे में है। यह ऑग फॉरमैट में है इन फाईलों को आप, Audacity, Mplayer, VLC media player, या Firefox में सुन सकते हैं। फाईल को डाउनलोड कर उक्त प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्राम को डिफॉल्ट में कर लें। This podcast in Hindi is about famou […]
  • RSS मुन्ने के बापू पर नयी प्रविष्टियां

    • पुराने रिश्तों में नया-पन, नये रिश्तें बनाने से बेहतर है
      यह चिट्ठी पति पत्नी के रिश्तों के एक पहलू के बारे में है।मैंने पिछली चिट्ठी 'मैं तुमसे प्यार करता हूं कहने के एक तरीका यह भी' में लिखा था कि इन्होंने (उन्मुक्त) मुझसे आज तक यह नहीं कहा कि 'मैं तुमसे प्यार करता हूँ' और मुझे इन शब्दों का इंतजार है। मैंने यह भी लिखा था,'यह मेरा जन्मदिन हमेशा याद रखते हैं पर लगभग दो दशक पहले मेरे जन्मदिन […]
    • बादलों का घर आना और गालों की लाली
      यह चिट्ठी शिलॉंग में हमारे कुछ अनुभवों को बताती है।कुछ दिन पहले अरविन्द भाईसाहब ने एक चिट्टी 'मैं शर्म से हुई लाल ....' लिख कर गालों की लाली के बारे में चर्चा की थी। इसके बाद अभिषेक भइया ने भी 'लाली देखो लाल की...!' चिट्ठी लिख कर कुछ अलग प्रकार के अनुभव के बारे में लिखा। इन चिट्ठियों पर मुझे २५ साल पहले गालों की लाली याद आयी। मैं बहुत दिन […]
    • मैं तुमसे प्यार करता हूं कहने के एक तरीका यह भी
      कुछ समय पहले शास्त्री भाईसाहब ने अपने चिट्ठे 'कच्चे धागे - Building Relations' पर एक चिट्ठी 'मैं तुमसे प्यार करता हूँ!!' नाम से लिखी। वे कहते हैं, 'आपसी स्नेह को प्रगट करना अधिकतर भारतीय पति पत्नी के लिये बहुत मुश्किल है ... इसमें एक बदलाव आना जरूरी है।' इन्होंने (उन्मुक्त) आज तक यह शब्द मुझसे नहीं कहे, मुझे इन शब्दों का इंतजार […]
    • महिला दिवस ८ मार्च को क्यों मनाया जाता है?
      अमेरिका में सोशलिस्ट पार्टी के आवाहन पर, यह दिवस सबसे पहले सबसे पहले यह २८ फरवरी १९०९ में मनाया गया। इसके बाद यह फरवरी के आखरी इतवार के दिन मनाया जाने लगा। १९१० में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन के सम्मेलन में इसे अन्तरराष्ट्रीय दर्जा दिया गया। उस समय इसका प्रमुख ध्येय महिलाओं को वोट देने के अधिकार दिलवाना था क्योंकि, उस समय अधिकर देशों में महिला को वोट दे […]
    • मुझे, जब विंडोज़ विस्टा की याद आयी
      मैं अध्यापिका हूं, गणित पढ़ाती हूं। मुझे काम की जगह से लैपटॉप मिला है। इस पर विंडोज़ विस्टा ऑपरेटिंग सिस्टम था। मैं इसके पहले डेस्कटॉप कंप्यूटर पर काम करती थी, जिस पर फेडोरा है। मुझे लैपटॉप पर काम करने में मुश्किल पड़ी।यह बहुत धीमा चलता था। किसी प्रोग्राम को चलाने के बाद बहुत देर तक इंतजार करना पड़ता था।लिनेक्स से विंडोज़ पर काम करना।यह लैपटॉप मेरा नहीं है, इ […]
  • मेरे पॉडकास्ट बकबक की फीड

    मेरे पॉडकास्ट बकबक की RSS फीड यह और फीड बर्नर से फीड है यह है।
  • बकबक पर पॉडकास्ट कैसे सुने

    बकबक पर अधिकतर ऑडियो क्लिपें ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप सारे ऑपरेटिंग सिस्टम में, फायरफॉक्स ३.५ या उसके आगे के संस्करण में सुन सकते हैं। इन्हें आप,

    * Windows पर कम से कम Audacity एवं Winamp में;

    * Linux पर लगभग सभी प्रोग्रामो में; और

    * Mac-OX पर कम से कम Audacity में,

    सुन सकते हैं। ऑडियो क्लिप पर चटका लगायें फिर या तो डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्राम को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले। इन्हें डिफॉल्ट करने के तरीके या फायरफॉक्स में सुनने के लिये मैंने यहां विस्तार से बताया है। मैंने इसे ogg फॉरमैट में क्यों रखा है यह आप मेरे उन्मुक्त चिट्ठे की पापा, क्या आप उलझन में हैं चिट्ठी पर पढ़ सकते हैं। यदि इसे mp3 फॉरमैट में सुनना चाहें तो यहां चटका लगायें।
  • RSS लेख पर नयी प्रविष्टियां

  • RSS उन्मुक्त पर नयी प्रविष्टियां

  • Archive for June, 2006

    साधू, फुटबाल, और संगम

    Posted by उन्मुक्त on June 24, 2006

    फुटबाल का जादू ऐसा,
    साधुवों के सर भी चढ़ा।

    संगम के किनारे,
    खेला फुटबाल उन्होने।

    देखिये ड्रिब्लिंग इनकी,
    क्या किसी से कम हैं ये।

    खाये मात इनसे,
    रोनेलडो और पेले भी।

    यह दो चित्र मेरे एक मित्र ने भेजे हैं।

    यह चित्र Associated Press AP 21 June 2006 के सौजन्य से है।

    यह चित्र Pioneer और PTI 21 June 2006 के सौजन्य से है।

    यदि आप गणितज्ञ बूरबाकी के बारे मे जानना चाहें या पूरब-पश्चिम पिक्चर मे जीरो के महत्व वाले गाने को सुनना चाहें, या शून्य अथवा ogg म्यूज़िक फॉरमैट के बारे मे पढ़ने मे उत्सुक हों, तो उसे मेरे उन्मुक्त चिठ्ठे पर ‘शून्य, जीरो, और बूरबाकी’ कि चिठ्ठी पर यहां पढ़ सकते हैं।

    Posted in Uncategorized | 2 Comments »

    ओपेन सोर्स सौफ्टवेयर एवं लिनेक्स

    Posted by उन्मुक्त on June 7, 2006

    ओपेन सोर्स सौफटवेयर की चर्चा उंमुक्त के चिठ्ठे पर १५ कड़ियों मे १. ओपेन सोर्स सौफ्टवेर से शुरू होकर १५. ओपेन सोर्स सौफ्टवेयर: लिनूस टोरवाल्डस एवं बिल गेट्स के विचार पर समाप्त हो गयी| लिनेक्स के बारे मे भी चर्चा ५ कड़ियों मे १. लिनेक्स: शुरुवात – यूनिक्स से शुरू होकर ५. लिनेक्स: अन्य लम्बित मुकदमे पर समाप्त हो गयी| इनको लिखते समय कई बार मन मे आया कि इन्हे छोड़ दूं| इसके कई कारण थे,

    • इनको कसबे मे इंटरनेट कि अचछी सुविधा न होने के कारण upload करने की मुशकिल;
    • ब्लौगरडौट कौम ने जो नखरे किये सो अलग (यह परेशानी हम मे से कईयों ने झेली);
    • इतने बड़े लेख को हिन्दी मे लिखने कि परेशानी – इतना समय भी नहीं कि दिमाग उसी पर केन्द्रित रखा जाय| इसी लिये रूप रेखा तो बना ली, पर इसे थोड़ा थोड़ा करके कड़ियों मे लिखा| एक बार मे पूरे लेख को लिखना किसी और के बस मे हो पर कम से कम मेरे तो नहीं|

    यह सब तो परेशानी तो अपनी जगह पर, शायद इस बात की दुविधा सबसे ज्यादा कि क्या किसो को इन लेखों मे रुचि भी है अथवा नहीं| इनकी कोई जरूरत है भी कि नहीं| इन सब विषयों पर अंग्रेजी भाषा में बहुत कुछ और इन लेखों से अच्छा इन्टरनेट पर उपलब्ध है| क्या कोई इन्हे हिन्दी में पढ़ता भी है या पढ़ना चाहता है| क्या हिन्दी में उपलब्ध कराने के फायदे, उसे उपलब्ध कराने की मुश्किलो से ज्यादा हैं या हिन्दी मे उपलब्ध कराना ही इतना बड़ा फायदा है कि मुशकिलों को देखना नहीं|

    रुचि कि बात तो इन लेखों पर आयी टिप्पणियों से भी मिलती हैं इन दो लेखों कि कड़ियों का यदि विश्लेषण करे तो लिनेक्स के लेख पर कोई टिप्पणी नहीं और ओपेन सोर्स सौफ्टवेयर मे टिप्पणियों के लिये आपको माईक्रोस्कोप कि जरूरत पड़ेगी| पर कुछ टिप्पणियां अवश्य हैं, कुछ चिठ्ठेकार बन्धुवों ने अलग से ईमेल भी भेजी|

    रवी कामदार जी ने एक टिप्पणी करके सुझाव दिया कि इसे pdf फौरमैट मे रख दूं यदि कोई इसे download करके पढ़ना चाहे तो पढ़ सके| पहले तो मुझे यह समझ मे नहीं आया कि कैसे करूं फिर ब्लौगर डौट कौम के बाद वर्ड प्रेस पर ब्लौग शुरू किया| वहां पर इस तरह कि सुविधा है| इसलिये एक नया चिठ्ठा लेख नाम से शुरू कर के इन दोनो लेख को ओपेन सोर्स सौफ्टवेयर एवं लिनेक्स की कहानी के नाम से यहां और यहां रख दिया है| यहां पर इनकी पी.डि.एफ. फौरमट पर फाईल भी है, जो डाउनलोड की जा सकती है|यदि आगे कुछ संशोधन करना होगा तो उंमुक्त के चिठ्ठे पर लिख कर इन्ही लेखों पर कर दूंगा ताकि एक जगह updated version मिल जाय|

    अन्य लोगों ने जिन्होने कुछ गलती सुधारी और हौसला अफ़जाई की वे हैं अनुनाद जी, रजीव जी, काली चरन जी, जीतेन्द्र जी, फ्रेडिक जी, नितिन जी, नवीन जी, विवेक जी, एवं बेन जी|

    इन लेखों की कड़ियां लिखते समय मैने निम्न अन्य सम्बन्धित विषयों का उल्लेख तो किया था पर चर्चा नहीं की, वे हैं,

    • विश्व व्यापार संगठन तथा ट्रिप्स;
    • पेटेन्टस तथा इसका साफटवेयर से सम्बन्ध;
    • ओपेन डौक्यूमेन्ट फौरमैट (Open Document Format)|

    इन सब विषयों पर अंग्रेजी भाषा में बहुत कुछ इन्टरनेट पर उपलब्ध है पर शायद हिन्दी में नहीं हिन्दी में इसे उपलब्ध कराने में कुछ मुश्किल होती है| बताइयेगा कि,

    • क्या हिन्दी चिठ्ठों पर इस तरह के लेखों की जरूरत है?
    • क्या लोग हिन्दी में इस तरह के लेख पसन्द करते हैं ?

    पर यह सब उन्मुक्त मे ही; वह भी कड़ियों मे| एक बार मे बड़े लेख को लेखों कि आशा करना, …. है|

    यदि आप,

    • फाइनमेन के व्यक्तित्व के बारे मे जानना चाहें या चैलेंजर दुर्घटना क्यों हुई के जांच कमीशन मे उनकी भूमिका के बारे मे तो उसे उंमुक्त चिठ्ठे पर फाइनमेन कड़ी की पांचवीं तथा अन्तिम पोस्ट पर यहां देख सकते हैं; और
    • नारद जी की छड़ी वाली पहेली का शतरंज के जादू या इसका कमप्यूटर विज्ञान से सम्बन्ध के बारे मे जानने मे इच्छुक हों तो उसे नारद जी की छड़ी और शतरंज का जादू की छटी एवं अन्तिम कड़ी मे यहां देख सकते हैं; और
    • यह जानने मे दिलच्सपी रखते हैं कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की वेब साईट क्यों और न्यायालयों की वेब साईट से भिन्न है और यह वेब साईट न्यायालयों की वेब साईट से क्यों अनूठी है तो आप उसे मेरी अनुगूँज 20: नेतागिरी, राजनीति और नेता की प्रविष्टि के फुटनोट पर यहां देख सकते हैं|

    Posted in कानून | 1 Comment »

    आईने, आईने, यह तो बता – दुनिया मे सबसे सुन्दर कौन

    Posted by उन्मुक्त on June 4, 2006

    मै आपको स्नो-व्हाईट और सेवेन द्वार्फस की कहानी नहीं बताने जा रहा हूं| मै तो आपसे आईने के प्रतिबिम्ब, पैरिटी कंज़रवेशन, ४=५, और समलैंगिक रिस्तों के बारे मे बात करने जा रहा हूं| जी हां, वही ४=५ की विसंगति जिसे मैने यहां बताया था| आप तो कहेंगे,

    ‘अच्छा मजाक कर लेते हो| क्या इन सब मे कोई सम्बन्ध है? बड़ी मुशकिल से टोने-टोटके वाले ब्लौग से छुटकारा मिला है|’

    इस विषय के बारे मे चर्चा करने से पहले, स्पष्टीकरण|

    यह विसंगति ईमेल के द्वारा नितिन जी ने मुझे भेजी थी पर उसमे वह कुछ नहीं लिखा था जिसका जिक्र मैंने अपनी पोस्ट पर किया था| वे मुझसे उस तरह की विसंगतियों के बारे मे लिखने को कह रहे थे| उस समय मै समलैंगिक रिश्तों के बारे मे नहीं लिखना चाहता था – कुछ दुविधा मे था| लगा कि मालुम नहीं क्या अर्थ निकाला जायेगा – क्या हम इस तरह की बात-चीत करने के लिये परिपक्व हैं? इसिलिये मैने कुछ और विसंगतियां लिखते हुये वापस इस सुझाव के साथ भेजा कि वे इसे पहेलीबाज जी के पास भेज दें ताकि वह इसे अपने चिठ्ठे पर पहेली की तरह पूछ सके| उसके बाद, दो बाते हुईं,

    ‘शायद जर्मनी की हवा ने क्षितिज को अपनी सेक्सुअल पसंद की खुलेआम चर्चा करने का साहस दिया है। क्षितिज आपकी साफगोई की प्रशंसा करते हुए हम उम्मीद करेंगे कि समलैंगिक संबंधों के विषय पर और लिखेंगे।’

    तब मुझे लगा कि इस विषय पर बात की जा सकती है| इसलिये मैने इसे थोड़ा मोड़ देते हुऐ पूछ लिया| अब चलते हैं, कि इन सब के सम्बन्ध के बारे मे चर्चा करते हैं|

    यह विषय कुछ बड़ा है और एक पोस्ट मे नहीं हो सकता मेरे पास समय कम है – मुन्ने की मां बच्चों सहित अभियान ट्यूरिंग पर निकल चुकीं हैं इसलिये मै केवल भूमिका ही लिखूंगा और बाकी फिर कभी यदि ‘अभियान ट्यूरिंग’ से इजाद मिल सकी तो| पर वह सब आपको मिलेगा केवल उंमुक्त के चिठ्ठे पर|

    इस विसंगति मे गणित के अंको (rational numbers) का प्रयोग किया गया है| यदि हम ज़ीरो को छोड़ दें तो अंको को दो पारस्परिक अनन्य वर्गों – धन और ऋण के – मे बांटा जा सकता है| इन दो वर्गों कि खायियत यह है कि यदि आप किसी वर्ग के दो सदस्यों को ले और उनमे एक सम्बन्ध (यहां गुणे का) स्थापित करें तो हमेशा एक तरह का फल धन अंक ही आयेगा पर दोनो भागों से एक एक सदस्य ले तो हमेशा उल्टा फल यानि कि ऋण अंक आयेगा| जब इस तरह की बात होती है तो भौतिक शास्त्री कहते हैं कि पैरिटी (parity) संरक्षित (conserved) हो रही है|

    ४=५ की विसंगति मे, गणित के इस नियम का जिसमे धन अंक और ऋण अंक के वर्गों मे गुणे के सम्बन्ध को लेकर पैरिटी संरक्षित हो रही है, का उपयोग किया गया है| पर पैरिटी संरक्षण का यह मतलब नहीं है कि धन अंक और ऋण अंक आपस मे बराबर होते हैं| इस बात को उसी पोस्ट पर अन्य चिठ्ठेकार बन्धुवों के द्वारा की गयी टिप्पणियों मे बहुत अच्छी तरह से समझाया गया है| आप वहां इसे देख सकते हैं| चलिये, हम लोग वापस पैरिटी संरक्षण पर चले|

    प्रकति मे संरक्षण के कई नियम हैं – Conservation of momentum, Conservation of mass and energy. सारे संरक्षण के नियम के नियम किसी न किसी सम्मिति (symmetry) से जुड़े हैं| उन दोनो (संरक्षण और उससे जुड़ी सम्मिति) मे से यदि एक सच है तो दूसरा भी सच है; यदि एक गलत है तो दूसरा भी गलत है|

    पैरिटी संरक्षण का नियम, बांये-दायें की सम्मिति (symmetry) से जुड़ा है| बांये-दायें की सम्मिति (symmetry) यह बताती है प्रकृति बांये या दायें मे फर्क नहीं समझती – उसके लिये दोनो बराबर हैं| इसका यह मतलब नहीं है कि प्रकृति मे बांये या दायें का अन्तर नहीं होता है| इसका केवल यह मतलब है कि प्रकृति यदि कोई काम बांये तरफ से कर सकती है तो दायें तरफ से भी; प्रकृति, बांये या दायें दोनो को, बराबर पसन्द करती है; इनमे से किसी को ज्यादा ज्यादा पसन्द नहीं करती| दूसरे शब्दों मे कोई नियम नहीं है जिससे पता चल सके कि कोई बात यहां हो रही है और कौन सी उसके आईने के प्रतिबिम्ब मे| ४=५ की विसंगति इस तरह से पैरिटी संरक्षण और आईने के प्रतिबिम्ब से जुड़ी है| अब चलिये देखें कि यहां समलैंगिक रिश्ते कहां से आ रहें हैं|

    मानव जाति, अंकों की तरह है| यदि इनमे से जीरो की तरह intersex (जिसमे पुरुष एवं स्त्री दोनो के गुण होते हैं) को हटा दें तो मानव जाति भी पुरुष और स्त्री के दो वर्गों मे बंटी है| इनमे भी पैरिटी संरक्षित है – एक ही वर्ग के दो सदस्य कभी बच्चे को जन्म नहीं दे सकते पर अलग अलग वर्ग के दो सदस्य बच्चे को जन्म दे सकते हैं| अब नजर डाले सबसे मूलभूत मानवीय रिशते यानि के एक प्रेमी का अपनी प्रेमिका के बीच के रिशते या सेक्स के रिशते पर|

    हम, इस मूलभूत मनवीय रिशते मे भी, पैरिटी संरक्षण को लगाते चले आ रहें हैं| दो अलग अलग वर्ग के सदस्य के बीच प्रेम-सेक्स हो सकता है पर एक ही वर्ग के सदस्यों के बीच नहीं| यही धूर सत्य था और ज्यादर लोग कहते हैं कि यही होना चाहिये और समलैंगिक रिश्ते ठीक नहीं हैं|

    आईये देखें कि क्या भौतिक शास्त्र मे पैरिटी अब भी संरक्षित होती है|

    १९५७ मे रौचेस्टर विश्वविद्यालय मे भौतिक शास्त्र की एक गोष्टी मे इस तरह के सवाल उठाये गये कि क्या ऐसा हो सकता है कि कुछ परिस्थितियों मे पैरिटी न संरक्षित हो| उसके कुछ वर्ष बाद दो चाईनीस वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिया कि पैरिटी हमेशा संरक्षित नहीं होती है| इसके बहुत से परिणाम हैं, शायद, ज्यादा तर लोग दायें हांथ से क्यों काम करना पसन्द करते हैं; शिव भगवान का त्रिनेत्र दोनो आंखों के बीच नहीं होगा, इत्यादि, इत्यादि|

    जब प्रकृति मे पैरिटी हमेशा संरक्षित नहीं होती है; जब प्रकृति स्वयं थोड़ी विषम (asymmetrical) है; जब वह स्वयं थोड़ी तिरछी (skewed) है तो हम यह क्यों चाहते हैं कि हमारे मानवीय रिशतों मे सम्मिति हो, वे हमेशा सीधे हों| यदि उनमे कहीं विषमता हो तो उसे स्वीकारना चाहिये|

    इस लेख के मैने कई सवालों का उत्तर नही दिया| वास्तव मे यह लेख एक अन्य लेख ‘समलैंगिक रिस्ते एवं आईने के प्रतिबिम्ब’, लेख की भूमिका है| सारे उत्तर तो विस्तार से उसी मे दिये जा सकेंगे| इस लेख मे यह भी चर्चा करना चाहूंगा कि,

    • विश्व मे इस सम्बन्ध मे क्या कानून है;
    • अदालतों ने इस बारे मे क्या फैसले दिये हैं;
    • वे कौन से व्यक्ति हैं जो ऐसे रिश्तों मे विश्वास करते थे उनके बारे मे क्या मुकदमे हुऐ;
    • पैरिटी संरक्षण नियम के टूट जाने के क्या परिणाम हैं|

    पर यह लेख विवादास्पद है शायद उतना ही जितना कि टोने-टोटके का ब्लौग| बताईयेगा कि क्या आप इस विषय पर विस्तार से चर्चा पढ़ना पसन्द करेंगे या इसे यहीं छोड़ दिया जाय| विस्तार से तो यह उंमुक्त चिठ्ठे पर ही लिखा जा सकेगा और वह भी कड़ियों मे| बड़े लेखों को अपने काम के साथ एक बार मे लिख पाना सम्भव नहीं है और ऐसी किसी से आशा करना कि वह एक बार मे ही लेख को लिख देगा, … है|

    पैरिटी संरक्षण, आईने के प्रतिबिम्ब, और समलैंगिक रिस्ते, पर हम लोग बात करें कि नहीं, इसका निर्णय तो आप बतायेंगे, पर यदि आप,

    • फाइनमेन ने कौरनल और कैल-टेक मे कैसे समय बिताया और कैसे मौज मस्ती मे ही उन्होने उस विषय पर काम किया जिस पर उन्हे नोबेल पुरुस्कार मिला – इसके बारे मे जानने के लिये उत्सुक हों; या
    • नारद जी की छड़ी पहेली के अन्य रूप जानना चाहते हों;

    तो उसे मेरे उंमुक्त नाम के चिठ्ठे पर

    की पोस्ट पर पढ़ सकते हैं।

    Posted in गणित/पहेली, यौन शिक्षा, विज्ञान | 4 Comments »

    Error 404

    Posted by उन्मुक्त on June 2, 2006

    मैं कमप्यूटर विशेषज्ञ नहीं हूं और वर्ड प्रेस पर कुछ समय पहले चिठ्ठा लिखना शुरू किया है| चिठ्ठी पोस्ट करते समय मेरे चिठ्ठे का प्रिय दृश्य है – Error 404. कुछ दिन पहले, मै जब ‘चार बराबर पांच, पांच बराबर चार, चार…’ की चिठ्ठी पोस्ट कर रहा था तब दो उलझने पड़ीं:

    • Error 404 का दृश्य जो मेरा पीछा ही नहीं छोड़ रहा था; और
    • चिठ्ठी की उलझन, जो कि चिठ्ठी मे वर्णित है

    मैने वर्ड प्रेस की FAQ जा कर देखा| उसमे लिखी कोई भी गलती नहीं की फिर भी आंखों के सामने का दृश्य Error 404 ही रहा| सर्वज्ञ मे देखा तो भी कोई सहायता नहीं मिली| यही चिठ्ठी बार बार प्रकाशित किये जा रहा हूं पर Error 404 जहां की तहां| लगा पाठकगण भी परेशान हो रहें होंगे और नारद जी नाराज – कितनी बार वही चिठ्ठी पोस्ट करोगे|

    मैं परिचर्चा मे गया वहां भी कोई हल नहीं मिला| एक जगह जहां वर्ड प्रेस के चिठ्ठे की मुशकिलों की बात हो रही थी वहीं पर (जो मुशकिल मुझे यहां पड़ रही थी) इसको लिख कर वापस एक दूसरे वर्ड परेस के ब्लौग पर प्रयोग करना शुरू किया| कुछ कोशिशें और गलती के बाद कुछ हल निकाला| मैने चिठ्ठी प्रकाशित कि और हल को परिचर्चा पर जहां मुशकिल लिखी थी वहां लिख दिया|

    कुछ देर बाद रमन जी की ईमेल आयी जिसमे दोनो उलझनो का कुछ हल था| मैने उनसे प्रार्थना की के वे उसे परिचर्चा मे वहीं लिख दें जहां मैने उसका जिक्र किया है ताकि औरों को सहायता मिल सके| उन्होने वैसा ही किया और मुझसे मेरी कोशिश और गलतियों के बाद जो और पता चला हो उसे भी वंही लिखने को कहा| मैने भी वैसा किया| यह यहां पर है|

    अभी तक इस पर किसी विशेषज्ञ की नजर नहीं पड़ी थी| कुछ ही घन्टों के अन्दर निरुला जी की नजर इसमे पड़ी और उन्होने इसका एकदम ठीक विशलेषण कर के नयी लिंक मे यहां पर लिखा| यदि आप कमप्यूटर विशेषज्ञ नहीं है और वर्ड प्रेस पर चिठ्ठा लिखते हैं या लिखने की सोचते हैं तो इन दोनो लिंक को अवश्य देखें| यह आपको सहायता करेगा और मेरा सुझाव है कि सर्वज्ञ मे जहां ब्लौगर पर चिठ्ठा बनाने की बात लिखी है वहां पर इसे भी जोड़ दिया जाय क्योंकि यह मुशकिल वर्ड प्रेस के हिन्दी चिठ्ठे मे ही है अंग्रेजी के चिठ्ठे मे नहीं|

    यह पूरा घटना चक्र परिचर्चा के महत्व को उजागर करता है मै पुन: इसके बनाने वालों को बधाई देता हूं|

    एक बात और, यदि आप,

    • युवा फाइनमेन के बारे मे जानने के लिये उत्सुक हों; या
    • नारद जी की छड़ी पहेली के अन्य रूप जानना चाहते हों;

    तो उसे मेरे उंमुक्त नाम के चिठ्ठे पर

    की पोस्ट पर पढ़ सकते हैं|

    मेरी चिठ्ठी पोस्ट करने की उलझन तो चली गयी| टिप्पणियों मे सबके जवाब सही हैं| पर फिर भी चिठ्ठी के विषय के बारे मे उलझन अभी भी बनी हुई है| उसके दूर होने के लिये थोड़ा और इंतज़ार कीजिये।

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