Archive for May, 2006
चार बराबर पांच, पांच बराबर चार …
माफ कीजयेगा यह पोस्ट फिर से कर रहा हूं| क्या करूं Error 404 पीछा ही नहीं छोड़ रही है|
आप लोग सोच रहे होंगे कि मैं यह ‘चार बराबर पांच, पांच बराबर चार, चार…’ क्या कर रहा हूं| क्या करूं कुछ उलझन मे फंस गया हूं एक चिठ्ठेकार बंधु से [...]
आकाश के तारे वास्तव मे सूर्य हैं| उन्नीसवीं शताब्दी के अन्त मैं हार्वड औबसरवेटेरी ने तारों का वर्गीकरण इनसे निकली रोशनी का विश्लेषण करके किया| आज यह मालुम है कि यह मोटे तौर पर उनके तापमान पर निर्भर करता है| इस वर्गीकरण को A से शुरू होकर M तक के अक्षरों तक के एल्फाबेट [...]
परसों शाम उत्तर भारत के कुछ हिस्सों मे बारिश हुई, मेरे यहां भी| यह बूंदे हमेशा गोल होती हैं
बचपन मे हम लोग साबुन के बुलबुले भी उड़ाया करते थे:
साबुन का घोल बनाया,
नीम की पत्तियों के डंठल का आगे का हिस्सा गोल किया,
घोल मे डाला और हलके से फूका और
शुरू हो गये साबुन के [...]
मैने कुछ दिन पहले मैने फेडोरा-५ पर एक चिठ्ठी पोस्ट की थी उसमे जिस समस्या का जिक्र था वह यह थी कि Add and Remove प्रोग्राम से कोई प्रोग्राम जोड़ने पर वह इन्टरनेट पर चला जाता था लेकिन कमप्यूटर मे लगी सीडी पर से प्रोग्राम नहीं लेता था| मुझे इसका हल मिल गया [...]
'फुटबाल विशव कप और बेन्ड इट लाइक बेख़म' वाली पोस्ट नारद मे दिखायी नहीं पड़ रही है| मैं इसे पुन: पोस्ट कर रहा हूं असुविधा के लिये खेद है|
बेन्ड इट लाइक बेख़म पिक्चर तो देखी थी न?
मजेदार थी कि नहीं!
यह पिक्चर एक युवती और उसका फुटबाल खेल से लगाव के बारे मे थी| यह लड़की [...]
मैने लिनेक्स पर अपने चिठ्ठे उन्मुक्त पर लिखना शुरु किया और निम्न दो पोस्टे भी कीं|
१. लिनेक्स: शुरुवात - यूनिक्स से
२. लिनेक्स: करनल, डिस्ट्रीब्यूशन, डेस्कटौप
इसी बीच फेडोरा ने अपना पांचवां संस्करण निकाल दिया| इसकी सी.डी. लिनेक्स फौर यू पत्रिका ने अपनी मई २००६ अंक के साथ भेजी है| फेडोरा-५ को कमप्यूटर [...]
जी हां मै उन्मुक्त ही हूं और उन्मुक्त के नाम एक दूसरा चिठ्ठा ब्लौगर पर लिखता हूं| 'खुली चुनौती - भारत की' की बात करने से पहले दो शब्द इस चिठ्ठे के बारे मे|
ब्लौगर डौट कौम कुछ परेशान कर रहा था| समीर जी ने पहले 'ब्लागर डाट काम के नखरे- कुछ शरमाता है' नाम की [...]